राजस्थानी बच्चे के आभूषण
0 - 5 वर्ष की आयु वाले बच्चो के आभूषण
नजरिया -
बुरी नजर से बचाने हेतु लाल कपड़े में सोने का टुकड़ा , मूंग , चन्दन , घिसा हुआ सिक्का और कोड़ी की माला।
झांझरिया -
पैरो में घुंघरिया युक्त सांकली जिसे पेजणी भी कहते है।
कड़ो -
हाथ और पावो में पहने गए आभूषण।
लॉन्ग -
कान का आभूषण
राजस्थानी पुरुषो के द्वारा पहना गया आभूषण
अंगूठी -
अंगुली में पहने जाने वाला आभूषण
कड़ा -
कलाई में पहने जाने वाला (गजमुख , मयूरमुखा , सिंहमुखा )
कान के आभूषण -
लॉन्ग , मुरकिया , झाले , बालियाँ , छैलकडी ( कान में छेद ) , मादी , खुंगाली ,कड़कम , कुण्डल (सन्यासी )।
गले के गले का आभूषण -
चैन व पैडल , मादलिया , रामनामी , ताबीज , उत्तर , बलेवडा , चौकी , कठा।
बाजू में पहने जाने वाला आभूषण -
भुजबन्द
पैर के आभूषण -
छेलकड़ा (राजा से अनुमति ), बेड़ी , पागड़ो , टोडर।
सिर के आभूषण -
तुर्रा , कलंगी , मोतिपन्ना , गजमुखा , मस्तक मणि , मयूरपंख , सिरपेच , जेवड़ी , मोड़ , रतनपेच , आदि। (पगड़ी के ऊपर पहने जाते है। )
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