LAB ASSISTANT HOME SCIENCE 2022 PDF DOWNLOAD
आहार आयोजन
आहार नियोजन -विचार के उपरान्त यह सुनिश्चित करने की प्रक्रिया है कि व्यक्ति अथवा परिवार एक समय अवधि के अन्तर्गत अपने भोजन में कौन-कौन से भोज्य पदार्थ सम्मिलित करते हैं । यह समय अवधि एक दिन, एक सप्ताह या एक माह की हो सकती है। इस अवधि में व्यक्ति के आहार का स्वरूप आहार नियोजन द्वारा सुनिश्चित किया जाता है। भोजन किस प्रकार का होगा, उसमें कौन से व्यंजन सम्मिलित होंगे, कितनी मात्रा में एवं किस समय पर भोजन ग्रहण किया जाना चाहिए, इन सभी प्रश्नों के उत्तर आहार नियोजन के माध्यम से प्राप्त किए जा सकते हैं। एक बार आहार का स्वरूप (मेनू) तैयार हो जाने पर कच्ची खाद्य सामग्री क्रय की जा सकती है । केवल एक व्यक्ति की अपेक्षा सम्पूर्ण परिवार के लिए आहार नियोजन करना एक जटिल कार्य है जहाँ प्रत्येक सदस्य की पोषणीय आवश्यकताएँ भिन्न होती हैं । आहार नियोजन सामान्य एवं रोगग्रस्त दोनों प्रकार के व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण है। सभी सदस्यों को उचित पोषण प्राप्त हो, इसके लिए परिवार के आहार नियोजन आवश्यक है ।
आहार आयोजन के उद्देश्य
आहार नियोजन का मुख्य उद्देश्य है कि सभी व्यक्तियों को उनकी
आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त पोषक तत्वों की प्राप्ति हो । आहार नियोजन के अन्य उद्देश्य निम्न प्रकार हैंयह सुनिश्चित करना कि व्यक्ति किस समय, किस प्रकार का एवं कितनी मात्रा में भोजन ग्रहणकरेगा
। आहार को रुचिकर बनाने हेतु एवं उसमें विविधता लाने के लिए पाँचों खाद्य समूहों में से अलग अलग खाद्य पदार्थों को आहार में सम्मिलित करना ।
खाद्य पदार्थों को क्रय करने सम्बन्धी निर्णय लेना एवं पारिवारिक
आहार नियोजन से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
आहार नियोजन करने से पूर्व व्यक्ति को कुछ मूलभूत जानकारी
अवश्य होनी चाहिए जैसे;
• पोषक तत्व एवं उनके स्रोत
• पोषक तत्वों की शारीरिक माँग एवं विभिन्न व्यक्तियों के लिए पोषक तत्वों की अनुशंसित मात्राएँ ।
व्यक्तियों की आहरीय आदतें एवं आहारीय इतिहास
• मौसम के अनुरूप खाद्य पदार्थों की उपलब्धता एवं इनका अनुमानित क्रय मूल्य
नियोजन एक विश्लेषण प्रक्रिया है जबकि आधारभूत जानकारी (उपरोक्त तथ्यों) के परिप्रेक्ष्य में आहार नियोजन को व्यवहारिक एवं वास्तविक स्वरूप दिया जाता है। आहार नियोजन की प्रक्रिया में अनुभव एवं प्रयोग द्वारा सुधार लाया जा सकता है। किसी व्यक्ति का आहार आयोजन करने के लिए यह आवश्यक है कि हमें उसकी पोषक तत्वों की आवश्यकता के सम्बन्ध में उचित जानकारी हो ।
आहार आयोजन का महत्त्व निम्न कारणों से है
1 निर्धारित बजट में सभी के लिए संतुलित एवं रुचिकर आहारआयोजन करते समय परिवार की निर्धारित आय की राशि को इस प्रकार खाद्य सामग्री में वितरित किया जाता है जिससे प्रत्येक व्यक्ति के उचित आहार का चुनाव संभव हो सके । आहार आयोजन में प्रत्येक व्यक्ति की रुचि तथा अरुचि को भी ध्यान में रखा जाता है। आहार आयोजन से ही प्रत्येक व्यक्ति को संतुलित आहार किया जा सकता है। आहार आयोजन के बिना परिवार की आय-व्यय का बजट असंतुलित हो सकता है।
2.समय, श्रम, तथा ऊर्जा की बचत-
आहार आयोजन में आहार के जाती है। इससे समय, श्रम तथा पूर्व ही उसकी योजना बना
3.एक बार बाजार जाकर सभी समान लाया जा सकता है। प्रत्येक समय का भोजन बनाने हेतु सोचना नहीं पड़ता है की क्या बनाया जाये।
4. आहार में विविधता एवं आकर्षण आहार आयोजन के द्वारा आहार में विविधता आसानी से लायी जा सकती है। आहार में सभी भोज्य वर्गों का समायोजन करने से आहार में विविधता तथा आकर्षण उत्पन्न हो जाता है ।
5. बच्चों में अच्छी आदतों का विकास - आहार तालिका में सभी खाद्य वर्गों की सम्मिलित करने से बच्चों को भी खाद्य पदार्थों को खाने की आदत पड़ जाती है ।
आहार नियोजन/योजना के सिद्धान्त
कोई भी ऐसी संस्था जैसे परिवार, रेस्तरां, कैन्टीन, स्कूल का भोजनालय आदि जो भोजन परोसने के कार्य में सम्मिलित हैं, के लिए आहार आयोजन महत्वपूर्ण है। नियोजित आहार से एक प्रक्रिया प्रारम्भ होती है जिसके अन्तर्गत पुन: कुछ निर्णय लेने पड़ते हैं जैसे आहार बनाने हेतु कौन-कौन से खाद्य पदार्थ क्रय किए जाएंगे, खाद्य पदार्थ कितनी मात्रा में क्रय किए जाएंगे, खाद्य पदार्थों को बनाने में किस विधि का प्रयोग किया जाएगा एवं क्या आहार सूची भोजन ग्रहण करने वाले व्यक्तियों की पसंद के अनुरूप होगा? उपरोक्त प्रश्नों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि अच्छा आहार आयोजन करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है । आहार आयोजन के मूल सिद्धान्तों की जानकारी इस कार्य हेतु उपयोगी सिद्ध हो सकती है। आहार आयोजन के सिद्धान्तों का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के माध्यम से किया गया है
1. नियोजित आहार सन्तुलित होना चाहिए - आहार आयोजन इस प्रकार का हो कि व्यक्ति को सन्तुलित मात्रा में सभी पोषक तत्वों की पूर्ति हो । पोषक तत्वों की अधिकता एवं कमी दोनों ही स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं एवं कुपोषण को जन्म दे सकते हैं । यह भी कहा जा सकता है कि नियोजित आहार सन्तुलित होना चाहिए। आहार के स्वाद एवं जायके में भी सन्तुलन अपेक्षित है । अत्यधिक मसालेदार अथवा अत्यधिक फीके भोजन की स्वीकार्यता कम होती है। आयोजित आहार सूची में उच्च वसा/ऊर्जा युक्त तथा निम्न वसा / ऊर्जा युक्त खाद्य पदार्थों के मध्य एक सन्तुलन स्थापित किया जाना चाहिए।
2. नियोजित आहार द्वारा पोषक तत्वों की मांग की पूर्ति होएक परिवार में विभिन्न आयु के सदस्य होते हैं जिनकी क्रियाशीलता में भी विभिन्नता होती है। स्वाभाविक है कि इनकी पोषक तत्वों की आवश्यकताएँ भी भिन्न होंगी। आहार आयोजन इस प्रकार का होना चाहिए कि चयनित खाद्य पदार्थों द्वारा परिवार के सभी सदस्यों की पोषक तत्वों की मांग के अनुरूप आपति हो पाए । नियोजित आहार द्वारा व्यक्ति को सभी पोषक तत्व जैसे ऊजाँ,
3. आहार नियोजन में परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति की व्यवस्था हो अलग-अलग परिवारों के लिए अलग-अलग प्रकार के आहार नियोजन की आवश्यकता होती है। किसी परिवार में यदि छोटे बच्चों की संख्या अधिक होती है, उनके लिए पौष्टिक एवं कम मसालेदार भोजन की आवश्यकता होती है। वहीं दूसरी तरफ जिन परिवारों में किशोर बालक-बालिका होते हैं उन्हें अधिक पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसलिए आहार नियोजन ऐसा होना चाहिए जिससे परिवार में सभी सदस्यों की पोषण सम्बन्धी आवश्यकताएं पूरी हो पाएं ।
4. आहार नियोजन सरल होना चाहिए - आहार नियोजन इस प्रकार किया जाना चाहिए कि तैयारी में अत्यधिक परिश्रम एवं समय न लगे । जहाँ तक सम्भव हो आहार नियोजन में सरलता एवं सादगी रखी जानी चाहिए यदि प्रतिदिन के आहार को बनाने में अत्यधिक श्रम एवं समय व्यय होगा तो इस प्रकार किया गया आहार नियोजन व्यवहारिक नहीं होगा। आहार नियोजन में ऐसी प्रक्रियाओं एवं व्यंजन विधियों को महत्व दिया जाना चाहिए जिनका अनुसरण करना आसान हो । नियोजित आहार में पौष्टिकता एवं सादगी दोनों का समावेश होना चाहिए।
5. नियोजित आहार द्वारा पौष्टिक तत्वों की उचित पर्ति हो - नियोजित आहार को तैयार करने की प्रक्रिया में पौष्टिक तत्वों की हानि नहीं होनी चाहिए। उन पाक विधियों का चुनाव किया जाना चाहिए जिनसे अधिक पौष्टिक तत्वों की प्राप्ति होती है। जैसे अंकुरण, खमीरीकरण, माल्टिंग, प्रेशर कुकिंग आदि ।
6. आहार नियोजन में व्यक्तियों के पसंद-नापसंद का ध्यान रखा जाना चाहिए - नियोजित आहार तभी सफल कहलाता है जब वह उसे ग्रहण करने वाले व्यक्तियों की रुचि के अनुरूप होगा। व्यक्ति की भोजन सम्बन्धी आदतों, रुचियों एवं मान्यताओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए । व्यक्ति का धर्म, संस्कृति एवं मान्यताएँ भी भोजन सम्बन्धी आदतों को प्रभावित करते हैं। अत: आहार आयोजन में इन सब बातों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही आहार आयोजन में बच्चों, किशोर एवं वृद्ध व्यक्तियों की पसंद का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
7. आहार नियोजन व्यक्ति को तृप्ति प्रदान करने वाला होना चाहिए - प्रत्येक नियोजित आहार व्यक्ति को तृति प्रदान करने वाला होना चाहिए। आहार इस प्रकार का हो कि दो भोजन काल के मध्य के समय में व्यक्ति को भूख का अनुभव न हो। इसके लिए प्रत्येक भोजन में कुछ मात्रा में प्रोटीन, वसा, रेशे जैसे पोषक तत्वों का समावेश अवश्य होना चाहिए। वसा में सभी पोषक तत्वों की अपेक्षा अधिक तृप्ति प्रदान करने की क्षमता होती है। इसके अतिरिक्त एक व्यक्ति को भोजन में सम्मिलित अंश मात्रा (servings) पर्याप्त होनी चाहिए ।
8. आहार नियोजन व्यक्ति के बजट के
अनुसार होना चाहिएनियोजित आहार तभी सफल हो पायेगा जब वह परिवार के बजट के अनुरूप होगा। यदि आहार नियोजन में ऐसी खाद्य वस्तुएँ सम्मिलित की गई हैं जिनका मूल्य बहुत अधिक है तथा इनके कारण व्यक्ति के बजट में बहुत वृद्धि हो रही है तो ऐसा • आहार नियोजन न तो व्यवहारिक कहलाएगा और न ही सफल सिद्ध होगा। नियोजित आहार जहाँ तक सम्भव हो व्यक्ति के बजट के अनुसार होना चाहिए। खाद्य पदार्थों की मूल्य वृद्धि के कारण सीमित साधनों में सन्तुलित आहार की व्यवस्था एक कठिन कार्य है। ऐसी स्थिति में आहार आयोजन को महत्व दिया जाना चाहिए। खाद्य पदार्थों के बाजार मूल्य का समय-समय पर विश्लेषण करना चाहिए। जब खाद्य पदार्थों का मूल्य अपेक्षाकृत कम हो तो उन्हें अधिक मात्रा में क्रय किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में मौसमी फलों एवं सब्जियों की उचित संरक्षण की विधियाँ भी प्रयोग में लायी जा सकती हैं। घर के बगीचे से भी कुछ मात्रा में ताजे फल एवं सब्जियाँ प्राप्त की जा सकती हैं। मोटे अनाज, हरी सब्जियाँ कुछ विटामिनों, खनिज लवणों एवं अन्य पोषक तत्वों का उत्तम स्रोत हैं। इनका मूल्य भी कम होता है । स्थान विशेष में उपलब्ध खाद्य वस्तुओं का अधिक मात्रा में प्रयोग किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त खाद्य पदार्थों को राशन की दुकान से क्रय करने एवं खाद्य पदार्थ की व्यर्थ बर्बादी को नियंत्रित करने से भी बजट की सीमाओं के अनुरूप आहार नियोजन सम्भव है।
9. आहार नियोजन में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए - आहार नियोजन में मौसम के अनुसार उपलब्ध खाद्य पदार्थों को ध्यान में रखते हुए भोजन में सम्मिलित किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त स्थानीय तौर पर उपलब्ध खाद्य वस्तुओं का अधिक प्रयोग करना चाहिए। जो खाद्य पदार्थ संग्रह कर रखे जा सकते हैं, उन्हें उचित समय पर अधिक मात्रा में क्रय किया जा सकता है। ऐसा करने से कुछ सीमा तक खाद्य बजट को भी निय किया जा सकता है ।
आहार आयोजन को प्रभावित करने वाले निम्न करक है
1. आयु आयु विभिन्न पौष्टिक तत्वों की आवश्यता को निर्धारित करती है छोटे बच्चे माता के दूध या अन्य दूध पर आश्रित रहते हैं। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं उनका आहार थोडा ठोस जैसे
2. लिंग आहार आवश्यकताएं भिन्न-भिन्न होती हैं। पुरुष व लड़कों, महिलाओं व लड़कियों से अधिक खाते हैं। पुरुषों / लड़कों में चयापचन की दर अधिक होने के कारण होती है। स्त्रयों के शरीर में वसा की मात्रा अधिक होती है चयापचन दर व चाय के क्रिया तंतु कम होते है परन्तु पुरुषों की माँसपेशियों व मांसल भाग अधिक क्रियाशील होते है इस तरह लिंग भी पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता को निर्धारित करता है ।
3. व्यवसाय व क्रियाशीलता - यह दोनों करक भोजन को बहुत प्रभावती करते हैं। अधिक शरीरिक श्रम करने वालों को अधिक ऊर्जा की तथा अधिक मानशिक कार्य करने वालों को अधिक प्राटीन की आवश्यकता होती है ।
- 4. शारीरिक दशा परिवार में कोई रोगी गर्भवती स्त्री या स्तनपान करवाने वाली स्त्री हो तो पौष्टिक आवश्यकताएँ परिवार के अन्य सदस्यों से भिन्न होती है। जैसे - मधुमेह के रोगी को कम कार्बोज देने होंगे। गर्भवती स्त्री को अधिक पोषण की आवश्यकता होगी।
5.व्यक्तिगत कारक - व्यक्ति रूचि व अरुचि भी भोजन पर बहुत प्रबह्व डालती है। यदि पेट भरा हो परन्तु मनपसंद भोजन मेज पर रखा हो तो उससे खाने की तीव्र इच्छा होगी इससे पता चलता है की व्यक्ति कि रुच व अरुचि भोजन पर प्रभाव डालती है।
6.धर्म - आहार आयोजन को प्रभावित करने में धर्म भी एक महत्वपूर्ण करक है कुछ धर्मों में मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन आदि पदार्थ वर्जित है और परिवार में उनका सेवन नहीं किया जाता है। इस बात का आहार आयोजन करते समय ध्यान रखना चाहिए। धर्म
7. जलवायु एवं मौसम - आहार आयोजन को प्रभावित करने वाला एक कारक मौसम एवं जलवायु भी है। गर्मियों में सर्दियों की अपेक्षा कम पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता होती है। गर्मियों में ठण्ड पेय था सर्दियों की अपेक्षा कम पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता होती है। गर्मियों में ठण्डे था पेय पदार्थ की आवश्यकता होती है।
8. आदत - आहार आयोजन आदतों से भी प्रभावित होता है यदि परिवार के किसी सदस्य को चाय अधिक पिने की आदत है तो किसी सदस्य को दूध पिने की आदत होती है।
ये भी पढ़े डाउनलोड करे >>>>>

.png)
.jpg)

0 टिप्पणियाँ